मेरा देश,मैं ही संवारु
फैशन में वैसे कोई बुराई नहीं है,ज़िसे जो अच्छा लगे वो करे,हम एक आज़ाद देश के स्वतंत्र नागरिक हैं
पर उस समय वह अपनी सीमा को पार कर जाता है जब वो देशहित में न रहकर विचारों को दूषित कर देता है ,नव धनाढ्य वर्ग में एक नए तरीके का उन्माद,एक नए तरीके की उमंग है,पर उस शक्ति को वो सही रास्ता नहीं दिखा पा रहे हैं शायद, मैंने देखा है ,महसूस किया है ,की यह नयी पीढ़ी देश के लिए बहुत कुछ सोचती है,प्रेम करती है और बहुत कुछ समर्पित कर देने की इच्छा भी रखती है, पर दुःख और पीड़ा उन लोगो को देखकर होती है जो बिना सोचे समझे , अज्ञानता का बोध होते हुए भी देश को नीचे दिखाते हैं, बुराई करते हैं , उनके लिए यह भी एक फैशन है,और यही देश की उन्नति के रास्ते में एक बहुत ऊँची दीवार बनती जा रही है !!!
बचपन में स्वामी रामतीर्थ की जापान यात्रा के बारे में उनके लेख में पढ़ा था कि कैसे अपने देश की बुराई न हो जाए इसलिए वहां के नागरिकों ने उनके लिए विशेष ताज़े फलों का इंतज़ाम किया जब उनके मुंह से यह निकल गया कि इस देश में अच्छे फल नहीं मिलते …।और बाद में उनसे यह वादा भी लिया के आप अपने देश में जाकर हमारे देश की कृपा कर बुराई न कीजियेगा, पर आज की भारतीय पीढ़ी को मैंने सामाजिक रूप से,मीटिंग्स में,सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर, सभी ऐसी जगहों पर देश की बुराई करते हुए देखा है ,जहाँ उन्हें यह नहीं करना चाहिए,,…!हमारे देश में यह गलत है,यह बुरा है, यह कमी है और यह परेशानी है, बस यह ही इनके संवादों का सारांश होता है !!!!!
अगर कुछ बुरा है कहना गलत नहीं है ,पर हर जगह बुराई ही नज़र आये तो आपके नज़रिये में भी कुछ खोट हो सकता है, देश में अगर कुछ गलत हो रहा है तो उसको सबके सामने लाना ज़रूरी है,पर अगर आप सामाजिक रूप से देश की बुराई ही करते रहेंगे तो जिस तरह एक इंसान बार बार अपनी बुराई सुनकर आत्म विश्वास खो बैठता है वैसे ही देश भी उन्ही नागरिकों से बनता है और यदि हम देश की अच्छाइयों को भूलकर बस बुराइयों का ही बोध कराते रहेंगे तो हमारे देश का आत्मा विश्वास आहत होगा, और निराशा का भाव सर उठा लेगा, देश की जनता निराश होती है तो सब जानते हैं की उन्नति रुक जाती है,प्रेम सौहार्द की भावना कहीं खो सी जाती है,और ऐसा हो यह तो कोई भी नहीं चाहता.... !!!!
अब प्रश्न उठता है तो करना क्या चाहिए , आप सामाजिक स्थलों में देश की निंदा करना छोड़ दें, विदेशियों के सामने अपने देश की बुराई न करें,उन्हें उसकी अच्छाइयों का ज्ञान दें,खुद भी देश की उपलब्धियों के बारे में अधिक से अधिक जानें और इस महान देश की महानता पर गर्व करें ,देश के शक्तिबोध को ताकत दें ,सौंदर्य बोध को बाधाएं , बुराइयों से लड़ने के लिए उन्हें सामने ज़रूर लाएं,पर सिर्फ वहां जहाँ उनकी आवश्यकता हो, आर टी आई डालें,क़ानून और पुलिस की मदद करें,अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, उन्हें ऊँचे संस्कार दें और महिलाओं के सम्मान की बात बताएं।
तभी जाकर यह देश आपके सपनो का देश बनेगा …। हर किसी के सपने अलग होते हैं,उम्मीदें अलग होती हैं,पर उनके लिए उसका स्वयं का चेष्टा करना भी ज़रूरी है,कोई भी देश तभी महान बनता है जब उसके नागरिक,यानी कि उसकी नींव की ईंट अच्छी हो,समझदार हो,मेहनती हो....मैं आशा करता हूँ कि मेरा देश जो पहले से ही महान है , और महान बनेगा और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा … !!!!
रंजन तोमर
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